मेरे पड़ोसी पर हिंदी निबंध | Essay On My Neighbor In Hindi | Mere Padosi Essay In Hindi

मेरे पड़ोसी पर निबंध | Essay On My Neighbor In Hindi | Mere Padosi Essay In Hindi 

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मेरे पड़ोसी पर निबन्ध | Essay On My Neighbor in Hindi | मेरा पड़ोस पर निबंध | Mere Padosi essay in hindi 


मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है| वह अकेला जीवन नहीं बिता सकता| सामाजिक जीवन में सबे पहले अच्छे पडोसी की जरुरत होती है| दिन हो या रात, मुसीबत आने पर मदद माँगने के लिये सबसे पहेले हम पड़ोसी के पास ही पहुँचते है, क्योंकि वही हमारे समीप होता है| इसलिए हम कह सकते हैं की सच्चा स्वजन तो पड़ोसी ही होता है| वही हमें सुख-दुःख में मदद करता है| एक अच्छा पड़ोसी सौभाग्य से प्राप्त होता है, अगर बुरा पड़ोसी मिल जाए तो जीना दूभर हो जाता है| हर वक्त जान मुसीबत में पड़ी रहती है|

हमारे तीन पडोसी है| एक हैं श्रीमान् लालबिहारी जी|वे बड़े घमण्डी किस्म के हैं इसलिए किसी के बात करना वे अपनी शान के खिलाफ समझते हैं| न जाने वे अपने आप को क्या समजते हैं ? उनके तीन बच्चे है - एक लडका और दो लड़कियाँ, पर मजाल है वे बहार आकार किसी से बात कर जाएँ| बच्चों के साथ खेलना तक उनके लिए वर्जित है, परन्तु उनकी पत्नी कभी-कभी मिलने पर मुस्करा देती है पर बोलती कुछ नहीं| ऐसे पड़ोसी तो हुए या न हुए, बराबर ही हैं|

हमारे दुसरे पड़ोसी हैं चमनलाल सेठ, वे बहुत ही सीधे-सादे और मिलनसार आदमी हैं| उनकी पत्नी भी बड़ी सुशील महिला हैं| उनके दो बच्चे हैं -एक लड़का और एक लड़की |वे दोनों भी माता पिता की तरह हम से भाई-बहन की तरह मिल-जुल कर रहते हैं| उनसे हमारा कुछ भी काम पड़े तोह 'ना' नहीं करते| उनके दवाइयों की अपनी दुकान है| हम उन्हीं के यहाँ से दवाइयाँ खरीदते हैं, क्योंकि ईमानदार होने के कारण कभी नकली दवाइयाँ नहीं बेचते| वे सभी से स्नेहपूर्ण व्यवहार करते हैं| जब हमारे माता पिता बाहेर जाते हैं, तो वे हमारा ख्याल हमारे माता-पिता के समान करते हैं| हमें कभी उनकी कमी महसूस नहीं हिने देते| अगर कोई हमारे घर में बीमार पड़ा , तो वे दिन-रात एक करके उसकी देखभाल में ऐसे लग जाते हैं, जैसे कोई उनके घर का बीमार हो|इन सभी गुणों के कारण हम उनका आदर करते हैं|

हमारे तीसरे पड़ोसी हैं श्रीमान श्रीकान्त राव जी | वे बड़े से अजीब आदमी हैं| आज कल के जमाने में भी उन्होंने भारत की जनसंख्या बढ़ाने में काफी योग दिया है|उनके पाँच लड़के और तिन लडकियाँ हैं| उनका घर हमेशा कुरुक्षेत्र बना रहता है| उनकी पत्नी ब्स्दी झगड़ालू हैं| उनसे बात करने से भी घबराते हैं| एक बात कहो तो वे दस बात सुनती हैं| उनके बच्चे भी बड़े शरारती और असभ्य है| उन्हें किसी बात का भी ख्याल नहीं है| वे बड़े छोटे को बिना देखे हर एक को मुँहतोड़ जबाब देते हैं|उनके यहाँ रेडियो या टी.वी इतने जोर से बजाय जाता है कि पड़ोसियों के नाकों दम आ जाता है| अगर कोई कुछ कहे, तो उनकी पत्नी गालियाँ देने लगती हैं| भगवान् सभी को ऐसे पड़ोसियों से बचाए|

इस प्रकार हमारे पडोसी रंग-बरंगे हैं| सबका अपना-अपना राग है| इस पर भी सभी के बिच स्नेह का बन्धन है| सभी त्योंहारों में हम एक-दुसरे से प्रेमपूर्वक मिलते हैं, जैसे हम सभी एक ही परिवार के सदस्य हो| हम लोगों पर ऊँच-नीच तथा प्रान्तीयता का विष नहीं चढ़ता| हम सभी भाई-भाई की तरह प्रेम से रहते हैं , जिसके कारण हमारा सहयोग और अहवास मृदुता से भरा हुआ है|



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