Essay Kids: राशन की दूकान पर एक घंण्टा पर निबंध

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राशन की दूकान पर एक घंण्टा पर निबंध | Essay On Rasan Ki Dukan Par Ek Ganta In Hindi

राशन की दूकान पर एक घंण्टा पर निबंध | Essay On Rasan Ki Dukan Par Ek Ganta In Hindi


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Ration Dukan


राशन की दूकान पर एक घंण्टा पर निबंध | Essay On Rasan Ki Dukan Par Ek Ganta In Hindi


भारत एक प्रजातन्त्र देश है| इस देश में आमीर-गरीब हर तरह के लोग रहते हैं| सभी को खाने-पीने-रहने तथा काम की सुविधा मिले ऐसा प्रबन्ध स्वतन्त्र भारत सरकार की जिम्मेदारी है| इसी जिम्मेदारी को निभाने के लिए भारत सरकार ने देश के हर प्रदेश में राशन की दूकानों की व्यवस्था की है की गरीब और जरूरतमंद लोगों को खाद्य-सामग्री सरल और सस्ते मूल्यों पे मिल सके|आजादी मिलने के बाद से ही राशन की दूकानों की ओर भारत सरकार ने ध्यान दिया है| जैसे-तैसे करके एक देश की जनता इस योजना से कुछ अंश तक लाभ उठा रही है| पिछले महीने की बात है , रविवार का दिन था| घर में राशन , केरोसिन और शक्कर आदि कुछ भी न थे| मैंने भी करीब साढ़े आठ बजे हाथ में झोला और राशन कार्ड लिया और राशन लाइन में जा खड़ा हुआ|

मेरे दुकान पर पहुँचने के पहले ही करीब सैकड़ों लोग दूकान के सामने कतारबद्ध खड़े थे| मैंने भी अपना नम्बर कतार में लगा दिया| लाइन में स्त्री-पुरुष और बच्चे सब तरह के लोग खड़े आगे खिसकने का इन्तजार कर रहें थे| बीच में कुछ असामाजिक तत्त्व घुसने का षड्यंत्र कर रहें थे , मगर लाइन में खड़े लोग सर्तक थे| किसी को बीच में घुसने का मौका नहीं मिल रहा था| एक पुलिस मैन भी वहाँ ड्यूटी पर तैनात था| इसलिए गुण्डा-गर्दी करने वालों की दाल न गली| एक किसी सेठ की नौकरानी झूमती हुई आई और दस वर्ष की बालिका के आगे खाड़ी होने का झूठा प्रयास करने लगी| बालिका ने उसे अपने आगे खाड़ी होने से रोका| वह झगड़ पड़ी और उस गरीब बालिका के मुँह पर एक चाँटा लगाने की धमकी दी| लाइन के कुछ लोगों ने भी सेठ की नौकरानी को पीछे जाने की चेतावनी दी मगर वह किसी की बात मानने को तैयार न हुई| इसी बीच पाण्डू हवालदार जो चाय पिने गया था, वापस आ गया| उसने तुरन्त सेठ की नौकरानी को डाँटकर लाइन के पिछले छोर पर खड़ा कर दिया|दुकान का दृश्य बड़ा अदभुत लग रहा था|

गुण्डे और असामाजिक तत्त्व बहुत हाथ-पाँव मार रहें थे कि उन्हें राशन बिना लाइन लगाए मिल जाए मगर पुलिस की सावधानी के कारण उनकी एक न चली| सब काम सुचारू रूप से चल रहा था| धुप तेज थी| लोग पसीने से तर थे| मगर राशन पाने की आशा लगाये लाइन में खड़े अपने नम्बर की प्रतीक्षा कर रहें थे|

राशन-दूकान के मालिक ने कुछ सगे-संबंधी दूकान के पिछले दरवाजे से आते और बिना लाइन लगाए राशन दूकान से लेकर चले जाते| पहले तो इस बात का किसी को पता न था मगर एक बुढ़िया ने, जो मुझसे दस नम्बर आगे खाड़ी थी, उन लोगों को पहचान लिया| उसने बड़बड़ाना शुरू किया| लोगों का ध्यान बुढ़िया की ओर गया, लोगों ने बुढ़िया की बात पर ध्यान दिया| एक नवयुवक दूकान के पिछले दरवाजे पर जा खड़ा हो गया|दूकान मालिक का साला पिछले दरवाजे से घुसा और दस मिनट में राशन की थैली भरे हाथ में केरोसिन डिब्बा भरे पिछले दरवाजे से बाहर जाने लगा| उस नौजवान ने उसे पकड़ा और उसे घसीटता हुआ लाइन में खड़े लोगों के सामने आकर खड़ा कर दिया| हवालदार ने लोगों से माफी माँगी| सरकार की नीति भी इस मामले में नरम हैं|ऐसा करने वालों को सख्त सजा की व्यवस्था होनी चाहिए| जब सरकार ऐसे भ्रष्टाचारियों को दण्ड नहीं देती , तब तक राशन की दूकान पर ऐसी बेईमानी होती रहेगी|

एक घंण्टे बाद मेरा नम्बर आया |मैंने राशन कार्ड दिखाकर कारकुन से रसीद बनवाई| झोले में राशन लिया और अपने घर की रह पकड़ी |कई महीने बीत गए| एक घंण्टा राशन दूकान की लाइन वाली बातें मुझे आज भी याद हैं|


राशन की दूकान पर एक घंण्टा पर निबंध | Essay On Rasan Ki Dukan Par Ek Ganta In Hindi

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