Essay Kids: Essay on National Bird Peacock in Hindi

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Essay on National Bird Peacock in Hindi | हमारा राष्ट्रिय पक्षी मोर पर निबंध

Essay on National Bird Peacock in Hindi | हमारा राष्ट्रिय पक्षी मोर पर निबंध


हमारा राष्ट्रिय पक्षी मोर | हिंदी निबंध | Peacock Essay 


राष्ट्रभाषा, राष्ट्रीयगीत, राष्ट्रध्वज की तरह हमारा एक राष्ट्रिय पक्षी है- मोर| जो अपनी सुन्दरता और नृत्य के कारण पक्षियों में श्रेष्ट माना जाता है| यों तो खगराज के रूप में गरुड़ की मान्यता है, पर वास्तविक गरुड़ के दर्शन नहीं होते, केवल साहित्य और पुराणों में ही उनका वर्णन मिलता है| मोर के सर पर स्वाभाविक रो में कलूँगी बनी होती है, मानो विधाता ने उसे सहज मुकुट पहनाकर राजा बनाकर इस धरती पर भेजा हो| आकृति में भी इसकी बराबरी अन्य पक्षी नहीं कर सकते| शुतुर्मुग बड़ा अवश्य होता है, पर वह हमारे देश में नहीं होता| मोर के पंखो पर चंद्रमा की चमकीली आकृति होती है, आखों को बहुत अच्छी लगती है| टांगे लम्बी, पतली तथा मजबूत होती हैं, जो उसके विशाल शरीर को नृत्यमय बनाती है| इन सब दृष्टियों से यदि मोर को राष्ट्रिय पक्षी चुना गया है, तो वह उचित ही है|


मोर या मयूर का प्रकृति से घनिष्ट सम्बन्ध है| यद्यपि उसे कुछ लोग पालते हैं, चिड़िया-घरों में रखते हैं फिर भी वनों में स्वच्छन्द विचरण करना ही उसे पसंद है| मोर को सावन या वर्षा ऋतू विशेष प्रिय है| आकाश में छाये काले बादलों को देखकर वह गाने और नाचने लगता है| इस नाच में उसकी प्रिय मोरनी भी साथ देती है| मोर की आवाज तेज, पर मधुर होती है| मोर का वर्णन पूरे भारतीय साहित्य में सर्वत्र मिलता है| देवतओं में महं-सेनापति कार्तिकेय का यह वाहन है| इसका किसी पक्षी से वैर-विरोध नहीं है, किन्तु इसकी शत्रुता सर्पो से है| यह उन्हें निगल जाता है| मोर की श्रेष्टता का प्रमाण यह है की भगवन श्रीकृष्ण ने मोर-पंखों का मुकुट बनाया था| वह जब भगवान को प्रिय है, तो मनुष्य को क्योँ नहीं प्रिय होगा| लोग मोर-पंख अपने घर एवं पुस्तकों में रखते हैं| इससे सर्प-भय नहीं होता| प्राचीन काल की कृतियों में मोर के चित्र मिलते हैं| आज भी घरों की दीवरों पर मोर की आकृति बनाई जाती है| मोर-पंखों का उपयोग दावा में भी किया जाता है| मयूर-नृत बड़ा आकर्षक होता है, जो मोर मोरनी के नृत के अनुकरण पर बनाया जाता है| मंदिरों में या उसके बाहर जब भगवन की सावरी निकलती हैं| तब मोर-पंख के ही पंखे झुलाये जाते हैं| इस प्रकार मोर राष्ट्रिय पक्षी के साथ-साथ हमारा धार्मिक और सांस्कृतिक पक्षी भी है|