{{ बरसात के मौसम हिंदी निबंध }} Short Essay on Rainy Season in Hindi Language | Varsha Ritu Par Nibandh In Hindi

बरसात के मौसम हिंदी निबंध | Short Essay on Rainy Season in Hindi Language | Varsha Ritu Par Nibandh In Hindi


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Rainy Season | Varsha Ritu | बरसात के मौसम 



 बरसात के मौसम हिंदी निबंध | Short Essay on Rainy Season in Hindi Language | Varsha Ritu Par Nibandh In Hindi

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Essay :- 1 Rainy Season  | बरसात के मौसम


कड़कड़ाती गर्मी के बाद जून और जुलाई के महीने में वर्षा ऋतु का आगमन होता है और लोगों को गर्मी से काफी राहत मिलती है। वर्षा ऋतु एक बहुत ही सुहाना ऋतु है। वर्षा ऋतु आते ही लोगों में खासकर के किसानों में खुशियों का संचार हो जाता है। वर्षा ऋतु सिर्फ गर्मी से ही राहत नहीं देता है बल्कि यह खेती के लिए वरदान है। बहुत सारे फसल अच्छी वर्षा पर निर्भर करता है। अगर अच्छी वर्षा नहीं हुई तो ज्यादा उपज नहीं हो पाएगा, जिससे लोगों को सस्ते में अनाज नहीं मिल पाएगा।

वर्षा ऋतु भारत के बहुत सारे जगह पर पानी की किल्लत को दूर करता है। बहुत सारे लोग ऐसी जगह है जो पानी की कमी से जूझते रहते हैं। वर्षा होने से तालाबों में, नहरों में पानी भर जाता है और लोगों को खुलकर पानी का इस्तेमाल करने का मौका मिलता है। बारिश होते ही चारों ओर हरियाली छा जाती है, पेड़ पौधे तेजी से बढ़ते हैं और वातावरण खुशनुमा हो जाता है।

ज्यादा बारिश सिर्फ खुशियां ही नहीं लाता है बल्कि कभी-कभी जल प्रलय का कारण भी बनता है। कई जगह बहुत ज्यादा बारिश होने की वजह गाँव के गाँव डूब जाते है और जन-धन की हानि भी होती है। बहुत ज्यादा बारिश होने के कारण बहुत सारे खेत डूब जाते हैं और उसमें लगे फसल भी नष्ट हो जाते हैं। तेज आंधी तूफान में बहुत सारे घर गिर जाते हैं और बहुत से जानमाल को नुकसान पहुंचता है। तेज बारिश के कारण यातायात में भी असुविधा का सामना करना पड़ सकता है।

बारिश की ऋतु में रोगों के संक्रमण की संभावना अधिक हो जाती है और लोग अधिक बीमार पड़ने लगते हैं। इसलिए इस ऋतु में लोगों को सावधानी से रहना चाहिए और बारिश का मजा लेना चाहिए और जहां तक हो सके बारिश के पानी को संचित करने का उपाय ढूंढना चाहिए।

Essay : -  2  Rainy Season  | बरसात के मौसम


आज सुबह से गर्मी थी| ज्यों-ज्यों सूरज आसमान में चढ़ने लगा, त्यों-त्यों बेचैनी बढ़ने लगी| हवा बन्द और धुप तेज| किसी को चैन नहीं| सब के मुँह से "ऊफ" निकालने लगे| धुप देखते ही आँखें चौधियाँ जाती| इस भीषण गर्मी और उष्णता को देखकर अनुभवी लोग कहने लगे, आज वर्षा होगी, गर्मी चरम सीमा पर पहुँच गई है| किसी काम में जी नहीं लगता, परेशानी बन गई है, नींद हराम हो गई है|

अनुभवियों की बात सच निकली| दिन ढलते ही पश्चिमी आकाश में कुछ घटाएँ दिखाई पड़ी| छिटपुट बादल आकाश घेरने लगे| वे गहराते हुए, काली घटा का रूप धारण कर ऊपर चढ़ने लगे| बिजली चमकने लगी| हवा तेज हो गई| पर शीतलता के कारण बड़ी प्यारी लगती | सूखे और मुरझाए शरीर में नवजीवन भरने लगी| मेंढ़क अपनी टर्र-टर्र ध्वनि में वर्षा रानी का स्वागत-गान गाने लगे|

कुछ ही देर में बादलों से सारा आसमान ढक गया| बूँदे पड़ने लगी| पहले तो बूँद पड़ने से कुछ धुल उड़ी पर उनके तेज होने पर हवा चलने लगी|हवा की तेजी ने बौछारों का रूप धारण कर लिया| जो लोग गर्मी से व्याकुल हो बाहर निकल कर वर्षा का दृश्य देखने चले थे, कदम बढ़ाकर घरों को लौटने लगे| किन्तु बच्चों की टोली आनंद से खुले आकाश के नीचे उछल-कूद मचाने लगे| बच्चों को बहुत दिनों के बाद पानी मिला था और वे जी भर कर नहा रहें थे| वर्षा में भीगने का आनंद ही कुछ और होता है|

कुछ ही समय में प्रकृति ने अपना रंग बदल दिया| पेड़ों के मटमैले पत्ते निखरकर हरे-भरे होकर लहराने लगे| फुल भी धुल जाने से नया रूप धारण कर उमंग से झुमने लगे| माटी की सोंधी गंद साँस के साथ खींचकर ह्रदय में जगह बनाने लगी| अहा ! इस वर्षा के पहले दिन ने संसार की काया ही पलट दी|

वर्षा के इस पहले दिन का आनंद पशु-पक्षी भी ले रहें हैं| चरागाहों से भीगी बकरियाँ और सिर नीची किए भेड़े मन में ही प्रसन्न होकर लौट रही हैं| गाय-बैल वर्षा में आनंदित हो उठे हैं| भैसे तो पानी से अलग नहीं होना चाहती उनकी झुलसी हुई मोटी खाल जब तक तर नहीं हो जाएगी, तब तक वे टस से मस नहीं होंगी|

वर्षा खूब तेज हो गई| नालियों में पानी भर गया| दिन डूबने के पहले ताल-तलैया भर गये| उनमें बच्चे कागज की नाव दौड़ाने लगें| नाव चलाने की होड़ और बच्चों की दौड़ बूढों के मन में रस का संचार करने लगी| उनका बचपन आज उभर कर सामने आ गया है, पर बढ़पन्न के बन्धन में बंधे रहने से वे ऐसा आनंद नहीं ले पा रहे हैं|

वर्षा के अभाव और गर्मी के प्रभाव से संसार में जो व्याकुलता छाई थीं, वह वर्षा के पहले दिन ही दूर हो गई| जहाँ क्षण भर के लिए चैन नहीं मिल रहा था, वहाँ अब चैन की बंसी बज रही थी|

वर्षा के पहले दिन ने जहाँ धरती को हरा-भरा कर दिया, सब का मन उल्लास और उत्साह से भर दिया, वहाँ दीन-दुखियों की मुसीबत की सुचना | उनकी टूटी-फूटी झोपड़ियाँ टप-टप कर चू कर देने लगी| बेचारे रुखा-सूखा खाकर जहाँ पेट की आग कठिनाई से बुझा पाते थे, वहाँ झोपड़ियाँ सँवारने, भीगने से बचने की नई चिन्ता सवार हो गई|

इस प्रकार वर्षा का पहला दिन आनंद और पीड़ा का सन्देश वाहक बनकर हमारे सामने उपस्थित हुआ है| यह आश्चर्य की बात नहीं क्योंकि विधाता की सारी रचना रंगबिरंगी है|

Essay :- 3  Rainy Season  | बरसात के मौसम


वर्षा ऋतु का संसार के हर प्रांत में अत्यन्त महत्व है। विभिन्न प्रांतों में इसके आगमन का समय भिन्न-भिन्न होता है। समय जो भी हर किसी को इसका बेसब्री से इंतजार रहता है। भारत के उत्तर एवं पूर्वी क्षेत्रों में जून के अंत में तो दक्षिणी भागों में सितम्बर के महीनों में यह अपना असर दिखाता है। भारत में वर्षा के लिए मुख्य महीने आषाढ़, सावन और भादो है। भारत में अधिकांश वर्षा मानसून से ही होती है। वर्षा ऋतु को अपने अलौकिक सौन्दर्य के कारण ऋतुओं की रानी से भी संबोधित किया जाता है।

वर्षा ऋतु से पूर्व पेड़-पौधे सूख से जाते हैं। ताल-तालाब सूख से जाते हैं। बड़ी-बड़ी नदियां नाले के समान प्रतीत होने लगती है। छोटी नदियां से प्राय: विलुप्त ही हो जाती हैं। लोगों का हाल भयंकर गर्मी से बेहाल हो जाता है। किसान लगातार आसमान की ओर आंखें टकटकाए देखता रहता है, ताकि बरखा रानी बरसे और धरती की प्यास बुझाए। ऐसे भयावह आलम में जब वर्षा दस्तक देती है तो सबके चेहरे खिल पड़ते हैं। पेड़-पौधे, झाडि़यां, घास आदि फिर से हरे-भरे हो जाते हैं। ताल-तालाब और नदी-नाले फिर से लबालब हो जाते हैं। भयंकर गर्मी के बीच बारिस का आना सर्वत्र प्रसन्नता का संचार करता है। औसत बारिश से किसान अपने हल-बैल आदि लेकर खेतों की ओर दौड़ पड़ते हैं। कुछ ही दिनों में जो धरती विरान और उजाड़ हो गयी थी, अब फिर से हरी-भरी लगने लगती है। देखने पर लगता है, मानों धरती ने एक हरी चादर ओढ़ ली हो। कीट-पतंगे जो कुछ ही समय पूर्व तक धरती के आगोश में दुबके पड़े थे, पुन: सकि्रय हो जाते हैं। मेंढ़कों के टर्रटर्राने और झींगुर का संगीत आम हो जाता है।

वर्षा ऋतु से प्रभावित होकर अनेक कवियों और लेखकों ने अनेक छन्द और कविताओं का सृजन किया है। यह ऋतु कवियों और लेखकों को उनकी रचनाओं के लिए प्रेरणा और माहौल देती है। इस ऋतु को प्रेम के लिए सर्वोŸाम माना गया है। राग मल्हार वर्षा से ही प्रेरणा लेकर तैयार किया गया है।
अपनी नैसर्गिक सौन्दर्यता के बीच जैसा कि अति हमेशा ही नाशवान होता है, वैसा ही अति वर्षा हमेशा परेशानियां और संकट ही लाती है। अत्यधिक वर्षा से नदी-नाले इतने भर जाते हैं कि बाढ़ आने का खतरा मंडराने लगता है। यदि बाढ़ आयी तो खड़ी फसलें, मकानों और जान-माल की अपार क्षति करती है। हजारों लोग बेघर हो जाते हैं। अत्यधिक वर्षा हैजा, अतिसार, पीलिया, मलेरिया आदि रोगों को जन्म देती है। लोगों की जीना दुभर हो जाता है।

वर्षा यदि संतुलित हो तो यह वरदान और अनियमित अथवा असंतुलित हो तो अभिशाप के रूप में प्रकट होती है। आज वर्षा में अनियमितता पाया जाता है। इसके लिए मानवीय कि्रयाकलाप बहुत हद तक जिम्मेवार है। मानवीय गतिविधियों से लगातार वनों का ह्रास होता जा रहा है, जिसका प्रतिकूल प्रभाव वर्षा के वितरण पर पड़ रहा है। अत: हमें वन लगाने चाहिए जिससे कि भविष्य में यह किसी संकट को न्योता न दे। साथ ही हमें वर्षा जल को संचित रखने हेतु तथा अधिकाधिक उपयोग हेतु दीर्घगामी उपाय ढूंढ़ना चाहिए।

Essay - 4   Rainy Season  | बरसात के मौसम


प्रस्तावना : हमारा भारतवर्ष ऋतुओं का देश है। यहाँ पर प्रत्येक ऋतु अपनी प्राकृतिक शोभा के साथ आती। है अपने सौंदर्य के छठा को चरों और फैला देती है। यद्यपि सभी ऋतुओं की अपनी-अपनी विशेषताएं और महत्त्व है , किन्तु अपने मनोरम दृश्य तथा विविध उपयोगिता के कारण वर्षा ऋतु का अपना विशेष महत्त्व है।

वर्षा के पूर्व की दशा : वर्षा के आने से पूर्व ग्रीष्म की भयंकर गर्मी से धरती  तवे के समान तपने लगती है। ग्रीष्म की लपट भूमि -कण  कण को झुलसा देती है। पेड़-पौधे आदि  वनस्पतियां सूख जाती हैं। पशु-पक्षी भी व्याकुल होकर पानी के लिए तड़पने लगते हैं। भयंकर गर्मी से जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है और  सभी लोग दुखी होकर अपनी तपन को को शांत करने के लिए वर्षा की प्रतीक्षा में आकाश की और दृस्टि लगाए रहते हैं।

वर्षा का वर्णन : आषाढ़ मॉस के प्रारम्भ होते ही आकाश में बादल दिखाई देने लगते हैं। दिनों-दिन आकाश मंडल में काले बादल छाते ही चले जाते है। और वर्षा की बूँदें धीरे-धीरे गिरने लगती है ,जिसको देखकर पशु-पक्षी आनंदित होकर क्रीड़ाएं करने लगते हैं।  वर्षा के पड़ते ही सारी पृथ्वी , आकाश और अंतरिक्ष का दृश्य  है। जैसे ही पृथ्वी पर बूँदें पड़ने लगती है वैसे ही पृथ्वी से अद्भुत भीनी-भीनी सुगंध उठने लगती है। वृक्षों में नया जीवन आ जाता है और वे हरे-भरे हो जाते हैं। पक्षी गण कलरव करने लगते हैं। इस प्रकार वर्षा के आगमन से  वातावरण ही बदल जाता हैं।

वर्षा का दृश्य : पृथ्वी को मनोरम और अलौकि रूप को देखकर बादल भी उसकी औ आकर्षित होकर प्रेमी नायक की भांति झुकते ही चले आते हैं। और रसमय होकर उसे सरस बना देतें हैं। महाकवि तुलसीदास को उनके नमन में नम्रता दिखलाई देती है  कि -
वरषहिं जल्द भूमि नियराये, जथा नवहिं बुध विद्या पाए।
वर्षा काल में बादल आकाश में इधर-उधर दौड़ते हुए दिखाई देते हैं। वर्षा में स्त्रियां भी आनंदित होकर झूले के गीत और मल्हारों को जाती हुई बागों में झूला झूलते दिखाई देती हैं।

वर्षा ऋतु से लाभ : वर्षा के आगमन से हमारा मन और शरीर प्रसन्न हो जाता है। वर्षा के अनेक लाभ हैं। वर्षा के बिना कृषि करना संभव नहीं है। वर्षा होने पर ही खेतों में अन्न उत्पन्न होता  है। वर्षा से धान आदि चारे की उत्पत्ति होती है और उससे उपयोगी पशुओं का पालन होता है। नदियों में जल आ जाने से सिंचाई के लिए जल की पूर्ती संभव हो पाती है। वर्षा से सूखे पेड़-पौधों में भी जीवन आ जाता है। और वे अपनी पूरी गति से बढ़ने लगते हैं। इस प्रकार वर्षा से ईधन और चारे की भी सुविधा रहती है।

वर्षा ऋतु से हानि : एक और वर्षा का यह रूप इतना मनोरम और लाभदायक है तो इसका दूसरा रूप अति भयानक और संहारक भी है। अतिवृष्टि होने से नदी-नाले, तालाब अपनी सीमाओं को तोड़ देते हैं। चारों ओर जल ही जल दिखाई पड़ता है। बड़े-बड़े पेड़ पानी में बह जाते हैं। खड़ी हुई फसल बर्बाद हो जाती है। सैंकड़ों गाँव बाढ़ की चपेट में आकर अपना अस्तित्व खो बैठते हैं। सड़क, रेल-लाइनें और पुल सभी इससे क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। मनुष्य या पशु-पक्षी जो भी इसकी चपेट में आ जाता है उसका बस भगवान् ही मालिक है। बाढ़ से होने वाली अपार धन-जन की क्षति हमारे ह्रदय को दहला देती है। और इससे हैजा, मलेरिआ आदि अनेक रोग फैलने लगते हैं।

उपसंहार : इतना सब-कुछ होने पर भी वर्षा हमारे लिए अत्यंत लाभदायक है। वर्षा के बिना किसी प्रकार के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। यह मन को आनंदित करती है और जीवन को प्राण देती है। ाटन वर्षा सभी ऋतुओं में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।


Note :- कृपया ध्यान दें: इस वेबसाइट का उद्देश्य विद्यार्थियों को नक़ल करना सिखाना नहीं है, बल्क़ि जिन विद्यार्थियों को हिन्दी निबंध लिखने में कठिनाई मेहसूस हो रही हो उनके लिए हैं | विद्यार्थियों से निवेदन है की यहाँ दिए गए निबंदो को पढ़े, समझें और अपने शब्दोँ में खुद से लिखने का प्रयास करें


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